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बका लहराते हुए शातिर अपराधी ऋषिकेश उर्फ रिशु तिवारी को गिरफ्तार कर भेजा जेल
July 12, 2020 • TIMES OF CRIME , Editor : VINAY G. DAVID • मध्य प्रदेश / छत्तीसगढ़

बका लहराते हुए शातिर अपराधी ऋषिकेश उर्फ रिशु तिवारी को गिरफ्तार कर भेजा जेल

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मैहर // राज मणि मिश्रा 

नादन देहात थाना को मिली बड़ी सफलता

मैहर : जिला सतना के मैहर जनपद अंतर्गत ग्राम करतहा मे आए दिन कुछ असामाजिक तत्व जंगल विभाग की जमीन पर जबरिया कब्जा करते रहते हैं। 

समय-समय पर जंगल विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए उनसे जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई जाती है, इसी तारतम्य में गांव के कुछ लोगों की शिकायत के आधार पर शुक्रवार 10 जुलाई को जंगल विभाग द्वारा बड़ी कार्रवाई करते हुए आदतन अपराधी ऋषिकेश उर्फ रिशु तिवारी  पिता प्रदीप तिवारी द्वारा कब्जा की हुई जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया ।

जिसमें जेसीबी द्वारा अवैध कच्चा मकान गिरा दिया गया और कब्जे में ली गई कई एकड़ जमीन मुक्त कराई गई। जंगल विभाग की इसी कार्रवाई से बौखलाया हुआ ऋषिकेश उर्फ रिशु तिवारी हाथ में बका लेकर लहराते हुए गांव में घूम रहा था और कई लोगों को गाली गलौज कर धमका रहा था इसी बीच किसी मुखबिर ने पुलिस को सूचित कर दिया की किसी बड़े अपराध की साजिश के तहत  हाथ में बका लिए  रिशु तिवारी  घूम रहा है।

इतना सुनते ही तुरंत डायल हंड्रेड पुलिस हरकत में आई  और  देर न करते हुए आधे घंटे में घटनास्थल तक पहुंच गई, तब तक ऋषिकेश उर्फ रिशु तिवारी मौके से फरार हो चुका था फिर किसी तरह रात में 9:00 बजे दोबारा पुलिस द्वारा घेराबंदी कर इसे हथियार सहित गिरफ्तार किया गया और 25 आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया गया। नादन देहात थाना  प्रभारी रामायण मिश्रा जी से चर्चा के दौरान यह जानकारी मिली की ऋषिकेश तिवारी के पास मौके से बका हथियार भी जप्त हो चुका है।

इस आदतन अपराधी से गांव वाले  भी काफी परेशान हो चुके हैं वह कई बार और भी लोगों से गाली गलौज कर जान से मारने की धमकी दे चुका है इसीलिए गवाह के रूप में  गांव के प्रतिष्ठित लगभग 25 बड़े बुजुर्ग लोग थाने में उपस्थित हो गए थे उसे रात भर नादान देहात थाने में रखा गया और सुबह  मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया पर गंभीर अपराध होने की वजह से उसे जमानत नहीं मिल पाई और उसकी जमानत खारिज हो गई है इसी वजह से उसे जेल भेज दिया गया है।

गौरतलब हो कि आर्म्स एक अपराध के अंतर्गत अपराधी को अधिकतम 5 वर्ष तक की सजा हो सकती है।