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ग्रेसिम उद्योग द्वारा 100 करोड़ की सीएसआर राशि के नाम पर की गई धांधली के जांच का आदेश जारी
March 11, 2020 • TIMES OF CRIME , Editor : VINAY G. DAVID • मध्य प्रदेश / छत्तीसगढ़

 

ग्रेसिम उद्योग द्वारा 100 करोड़ की सीएसआर राशि के नाम पर की गई धांधली के जांच का आदेश जारी

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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567

नागदा. ओद्यौगिक शहर नागदा जिला उज्जैन, मध्यप्रदेश में स्थित ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (स्टेपल फाइबर डिवीजन) द्वारा विगत 5 वित्तीय वर्षों में सीएसआर के नाम पर किए गए 100 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच के किए असंगठित मजदूर कांग्रेस के प्रदेश संयोजक अभिषेक चौरसिया की शिकायत पर शासन द्वारा गंभीरता से निर्णय लेते हुए 5 सदस्यीय जांच दल का गठन कर दिया गया है।

जिन्हे 15 दिवस के भीतर ग्रेसिम उद्योग द्वारा नागदा एवं आसपास स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में करवाए गए समस्त कार्यों का भौतिक सत्यापन कर विस्तृत जांच रिपोर्ट बनाकर शासन को प्रस्तुत करना हैं।

अभिषेक चौरसिया ने बताया कि जांच दल के सदस्यों के रूप में श्रीमती मेघना भट्ट, सहायक श्रमायुक्त, उज्जैन , श्री टी आर रावत, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, उज्जैन , श्री आर पी वर्मा, अनुविभागीय दंडाधिकारी, नागदा , श्री गौतम अहिरवार, अनुविभागीय अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, नागदा एवं श्री सतीश मट्सेनिया ,मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नागदा को शामिल किया गया है ।

ग्रेसिम उद्योग द्वारा 100 करोड़ की धांधली के जांच का आदेश जारी

अभिषेक चौरसिया ने बताया कि भारत सरकार के कंपनी एक्ट 2013 की धारा 135 तथा सीएसआर पॉलिसी 2014 के तहत हर उद्योग को अपने नेट प्रॉफिट का कुल 2 प्रतिशत शुद्ध लाभ उस क्षेत्र के स्थानीय नागरिकों के विकास में लगाने का प्रावधान है । जहां इनकी औद्योगिक इकाई स्थापित हैं। लेकिन ग्रेसिम उद्योग द्वारा सीएसआर की राशि का दुरुपयोग देशभर में खर्च करने के नाम पर गुमराह कर किया गया है । जबकि नागदा में ओद्यौगिक प्रदूषण की सबसे बड़ी जिम्मेदार इकाई ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड ही हैं।

अभिषेक चौरसिया ने बताया कि ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड को नेट प्रॉफिट के 2 प्रतिशत के रूप में वर्ष 2014-15 में 20 करोड़, 2015-16 में 15.84 करोड़, 2016-17 में 15.84 करोड़, 2017-18 में 26.98 करोड़ एवं 2018-19 में 22 करोड़ से ज्यादा की राशि का खर्च कंपनी द्वारा किया जाना था लेकिन सिर्फ आंकड़ों के खेल में उलझाकर सबको गुमराह करने का कार्य किया गया है।

ग्रेसिम उद्योग द्वारा 100 करोड़ की धांधली के जांच का आदेश जारी

अभिषेक चौरसिया ने बताया कि उनकी शिकायत के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं-

  • 1) ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड के विगत 5 वित्तीय वर्षों 2014-15, 2015-16, 2016-17, 2017-18 एवं 2018-19 की ऑडिट रिपोर्ट की जांच की मांग की है ।
  • 2) ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड के द्वारा विगत 5 वित्तीय वर्षों में नागदा एवं आसपास स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में सीएसआर के तहत करवाए गए समस्त कार्यों की विस्तृत जांच करने की मांग की है । जिसमें कब, कहा और कितनी सीएसआर राशि का खर्च किया गया है।
  • 3) ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड द्वारा इंदुभाई पारीख मेमोरियल जनसेवा अस्पताल में सीएसआर के नाम पर किस प्रकार से आम नागरिकों को लाभ पहुंचाया गया है क्योंकि इसका संचालन सी.एस.आर. के तहत किया जाता हैं जिसमें आज दिनांक तक स्थानीय नागरिकों को किसी भी प्रकार की कोई भी सुविधा निःशुल्क नहीं दी जाती हैं । यहाँ तक कि ओ.पी.डी. का भी शुल्क 50 रुपये से 200 रुपए प्रति मरीज़ वसूला जाता हैं । दवाओं के लिए इन्हीं के मेडिकल स्टोर से महंगी दवा खरीदने का दबाव बनाया जाता हैं । फिर स्वास्थ्य के क्षेत्र में सीएसआर के तहत किस प्रकार से इनका सहयोग दिया जा रहा हैं ।
  • 4) ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड द्वारा संचालित आदित्य बिरला सीनियर सेकेंडरी स्कूल, आदित्य बिरला पब्लिक स्कूल एवं आदित्य बिरला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का संचालन किस आधार पर सीएसआर के माध्यम से किया जा रहा है । जबकि सबसे ज्यादा शुल्क लेकर शिक्षा इन्हीं विद्यालयों में प्रदान की जाती हैं।
  • 5) ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड के द्वारा सीएसआर के तहत चंबल नदी के किनारे स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के टैंकर सप्लाई का कार्य किया जा रहा है जबकि नागदा स्थित चंबल नदी के समस्त जल स्त्रोतों पर ग्रेसिम उद्योग का ही आधिपत्य हैं । टेंकरो पर इस बात की पुष्टि भी हैं कि यह टैंकर सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड द्वारा संचालित हैं ।

अभिषेक चौरसिया ने बताया कि जांच समिति को ग्रेसिम उद्योग द्वारा किए गए प्रत्येक कार्य का भौतिक सत्यापन करना हैं क्योंकि इनके द्वारा शासन को प्रस्तुत किए जवाब में इस बात का उल्लेख किया गया है कि इनके द्वारा निशुल्क स्वच्छ पेयजल आपूर्ति, निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाए , उच्च शिक्षा सहायता, स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को लोन देकर स्वरोजगार में मदद करने, ग्रामीणों को दुग्ध पालन, बकरी पालन, डेयरी, सिलाई कढ़ाई , कंबल बुनाई कार्य आदि की ट्रेनिंग देने सहित विभिन्न कार्यों में सीएसआर राशि खर्च की जा रही है। अतः इस बात की पुष्टि होना अत्यंत आवश्यक है कि कितना लाभ आम नागरिकों को सीएसआर के तहत हो रहा हैं ।