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लॉकडाउन के दौरान लेन्सेक्स उद्योग एवं ग्रेसिम केमिकल डिवीजन के संचालन के विरूद्ध राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली में याचिका दर्ज
April 19, 2020 • TIMES OF CRIME , Editor : VINAY G. DAVID • राष्ट्रीय
लॉकडाउन के दौरान लेन्सेक्स उद्योग एवं ग्रेसिम केमिकल डिवीजन के संचालन के विरूद्ध राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली में याचिका दर्ज

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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567

नागदा. औद्योगिक शहर नागदा के लेन्सेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं ग्रेसिम केमिकल डिवीजन द्वारा नागदा जिला उज्जैन, मध्यप्रदेश में अपनी प्रोडक्शन इकाइयों का संचालन COVID-19 के अंतर्गत उज्जैन जिले में लागू संपूर्ण लॉकडॉउन के दौरान भी किया जा रहा हैं ।

जिसके दौरान सैकड़ों की संख्या में मजदूरों की जान को जोख़िम में डालकर प्रतिदिन कार्य पर बुलवाया जा रहा हैं । जबकि नियमानुसार समस्त मजदूरों को वेतन के साथ अवकाश दिया जाने का प्रावधान हैं । उक्त मामले को लेकर असंगठित मजदूर कांग्रेस के प्रदेश संयोजक अभिषेक चौरसिया ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की नई दिल्ली बेंच में शिकायत याचिका प्रस्तुत की हैं ।

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इस मामले में एसडीएम नागदा आर.पी. वर्मा, तहसीलदार विनोद शर्मा, लेक्सेस उद्योग के यूनिट हेड संजय सिंह, ग्रेसिम केमिकल डिवीजन के यूनिट हेड प्रेम तिवारी एवं महाप्रबंधक आरसी जांगिड़ को पार्टी बनाया हैं । उक्त मामले में आयोग द्वारा केस दर्ज कर केस डेयरी क्रमांक 4214/आईएन/2020 प्रदान किया हैं ।

चौरसिया ने बताया कि इस मामले में नागदा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री आरपी वर्मा एवं तहसीलदार श्री विनोद शर्मा की संलिप्तता होने की वजह से किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही संबंधित उद्योगों के विरूद्ध आज दिनांक तक नहीं की गई है । नागदा शहर को सैनिटाइज करने के नाम पर इन ओद्यौगिक इकाइयों का संचालन करवाया जा रहा हैं जबकि वस्तुस्थिति यह हैं कि शहर को सैनिटाइज करने की जगह इन उद्योगों द्वारा अपनी इकाई का संचालन कर इनके मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट का उत्पादन भी किया जा रहा हैं । जो कि जनहित में न्यायोचित नहीं हैं ।

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चौरसिया ने सवाल उठाया है कि मजदूरों को नौकरी से हटाने की धमकी देकर काम पर बुलवाया जा रहा हैं। जिसके संबंध में पूर्व में लेक्सेस उद्योग के अधिकारी और मजदूरों के मध्य बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी वायरल हुई थी लेकिन उस पर भी आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं हुई । जबकि आज इस महामारी के दौर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सभी नागरिकों को अपने अपने घरों में रहना अनिवार्य हैं । अगर समय रहते इन उद्योगों का उत्पादन कार्य नहीं रुकवाया गया तो नागदा शहर और आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण फैलने की पूर्ण आशंका बनी हुईं हैं और भविष्य में किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी ।

लेन्सेक्स उद्योग एवं ग्रेसिम केमिकल डिवीजन के संचालन के विरूद्ध राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली में याचिका दर्ज

चौरसिया ने यह भी कहा कि नागदा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री आरपी वर्मा द्वारा आज देश में इस महामारी को देखते हुए नागदा में इमरजेंसी की स्थिति में भी अपना मोबाइल फोन तक नहीं उठाते हैं। ऐसी स्थिति में आम नागरिक अपनी समस्या लेकर किसके समक्ष जाएं ।

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कल दिनांक 15/04/2020 को मेरे द्वारा फोन करने एक इमरजेंसी के लिए मदद हेतु एसडीएम नागदा को कॉल किया गया लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाया । फिर उसके पश्चात बीएमओ नागदा श्री कमल सोलंकी और प्रभारी जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ महावीर खंडेलवाल की सहायता से मेरे द्वारा स्थानीय हार्ट के मरीज को तत्काल उज्जैन रेफर करवाया गया।

चौरसिया ने मांग की है कि उद्योग सिर्फ सैनिटाइजर बनाए इसपर किसी भी आम नागरिक को आपत्ति नहीं हैं लेकिन शहर को सैनेटाइज करने के नाम पर उद्योग का 50 प्रतिशत संचालन ही शुरू कर लाखों आम नागरिकों की जान जोखिम में डालना कहा तक उचित होगा । अतः इन उद्योगों में कार्यरत मजदूरों को वेतन के साथ अवकाश तब तक दिया जाना सुनिश्चित करवाया जाए जबतक लॉकडाउन जारी रहेगा ।