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सवारी डिब्बा पुन निर्माण कारखाने की जलन समस्याओं के निराकरण हेतु ज्ञापन
August 26, 2020 • TIMES OF CRIME , Editor : VINAY G. DAVID • मध्य प्रदेश / छत्तीसगढ़
सवारी डिब्बा पुन निर्माण कारखाने की जलन समस्याओं के निराकरण हेतु ज्ञापन

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भोपाल रिपोर्टर // रविंद्र गुप्ता : 9806105237

भोपाल। दिनांक 24 /08/ 2020 को संघ द्वारा सडिपुका भोपाल में ज्ञापन सौपा गया, सडिपुका भोपाल में पूर्व में एम एल आर का कार्य किया जाता था रेलवे बोर्ड ने माह अप्रैल 2020 से एम एल आर का कार्य पूर्ण रुप से बंद करने का आदेश दिया।

जिसके फलस्वरूप अब सीआरडब्ल्यूएस में पीओएच का कार्य किया जा रहा है, सीआरडब्ल्यूएस में पीओएच के कार्य हेतु मानव घंटे निर्धारण नहीं होने से तिरुपति वर्कशॉप की वर्क स्टडी के अनुसार, सीआरडब्ल्यूएस में मानव घंटों का निर्धारण किया गया है।

ज्ञात हो कि तिरुपति वर्कशॉप में इंसेंटिव की गणना हेतु वर्कशाॅप को पांच ग्रुप बॉडी , बोगी , व्हील ईटीएल एवं पेंट शॉप में बांटा गया है किंतु भोपाल सवारी डिब्बा पुन निर्माण कारखाने में बोगी, एयर ब्रेक, पेंट , बॉडी, फर्निशिंग , कारपेंरट्री, ईटीएल एवं शैल शॉप सहित नौ ग्रुप में इंसेंटिव की गणना की जाती है जिससे कर्मचारियों में बहुत असंतोष व्याप्त है और कर्मचारियों को कम रेट से इंसेंटिव मिल रहा है।

कारखाने में 25 परसेंट विभागीय जेई की अधिसूचना लगभग 1 वर्ष पूर्व निकली थी वह अधिसूचना प्रशासनिक त्रुटि के कारण फल स्वरुप वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी एवं मुख्य कारखाना प्रबंधक भोपाल के पास विगत 6 माह से अनिर्णय की स्थिति में पेंडिंग है।

संघ कार्यालय के संबंध में सडिपुका भोपाल कारखाने के संघ कार्यालय में निर्माण हेतु माँगाई गई सीटों को आई ओ डब्ल्यू द्वारा उठा लिया गया है, कार्यालय में दरवाजे व खिड़की टूटी हुई है कार्यालय की पुताई होना है तथा कार्यालय की बाउंड्री वाल टूटी हुई है जिसके लिए स्ट्रक्चर तैयार है परंतु इंजीनियरिंग विभाग द्वारा कार्य में जानबूझकर देरी की जा रही है।

कारखाने में 50 परसेंट असिस्टेंट वर्कशाॅप से तकनीशियन-3 की पदोन्नति के लिए आदेश पिछले 1 वर्ष से लंबित है।

रेलवे अस्पताल द्वारा कर्मचारियों को कोरोना काल में कोरोना का फैलाव के बचाव हेतु रेल कर्मचारियों को होम आइसोलेशन क्वारंटाईन किया जा रहा है। ऐसे कर्मचारियों को विशेष आकस्मिक अवकाश प्रदान किया जाए ।उपरोक्त समस्याओं का समाधान प्रशासन द्वारा यदि 15 दिनों के अंदर नहीं किया जाता है तो संघ को मजबूर होकर स्थानीय प्रशासन के खिलाफ आंदोलन हेतु बाध्य होना पड़ेगा जिसके लिए स्थानीय प्रशासन पूर्ण रूप से जिम्मेदार होगा । संघ का आंदोलन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अलग-अलग तरीकों से लगातार जारी रहेगा