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सेवा सहकारी समिति प्रबंधक से बैठकर किसानों के गेहूं उपार्जन का पैसा जो कर्ज के नाम पर काटा, किसान क्रेडिट कार्ड कर्ज को देने का आग्रह किया
June 18, 2020 • TIMES OF CRIME , Editor : VINAY G. DAVID • मध्य प्रदेश / छत्तीसगढ़
सेवा सहकारी समिति प्रबंधक से बैठकर किसानों के गेहूं उपार्जन का पैसा जो कर्ज के नाम पर काटा, किसान क्रेडिट कार्ड कर्ज को देने का आग्रह किया

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ब्यूरो चीफ गाडरवाराजिला नरसिंहपुर // दीपक अग्रवाल : 9039 5134 65 

भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधि मंडल ने सेवा सहकारी समिति प्रबंधक से बैठकर किसानों के गेहूं उपार्जन का पैसा जो कर्ज के नाम पर काटा गया है उसके बाद भी नया कर्ज नहीं देने के मुद्दे पर शाखा प्रबंधक से बात कर शीघ्र अति शीघ्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड कर्ज को देने का आग्रह किया.

इस विषय में हमारे भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष सरदार सिंह पटेल जी ने भी माननीय कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत कराया एवं स्थानीय पत्रकार दीपक अग्रवाल माध्यम से क्षेत्र के किसानों की समस्या को प्रशासन के समक्ष रखा हमारा मानना है हर किसान हमारा नेता है इसलिए आम किसान को भी अपने हक की लड़ाई के लिए आगे आना चाहिए और अपने अधिकार लेने के लिए सक्षम अधिकारी से प्रत्यक्ष सीधी बात करना चाहिए भारतीय किसान संघ हर मोर्चे पर क्षेत्रीय शांति साथ खड़ा है.

समय-समय पर भारतीय किसान संघ रचनात्मक आंदोलना एवं संगठनात्मक गतिविधियां चलाता रहता है उन कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में सम्मिलित होकर किसान संघ को मजबूत करें और अपने हक की लड़ाई को प्राप्त करें यही निवेदन क्षेत्रीय किसानों से हमारा है माननीय प्रशासन से भी निवेदन है मौसम में मूंग की फसल को किसान तैयार कर रहा है ऐसे समय में मंडी में किसानों को मात्र 50  टोकन दिए जा रहे हैंओर और ₹7000 कीमत की मूंग को मनमानी कीमत पर खरीदा जा रहा है यह किसान के साथ धोखा है।

अतः किसान को मनमानी नियमों में बांधकर परेशान करना घोर आपत्ति का विषय है इसलिए प्रशासन को संज्ञान लेकर किसान को मुंग बेचने में असुविधा ना हो इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए मंडी प्रशासन व्यापारियों की सुविधाओं का तो ध्यान रखता है परंतु किसानों के ऊपर मनमानी नियम लगाकर मंडी के गेट बंद कर देता है जैसा कि वर्तमान में मूंग खरीदी खरीदी को लेकर देखने में आ रहा है इतने बड़े क्षेत्र में मात्र 50 टोकन रोज देना एक तरफा निर्णय है भारतीय किसान संघ का मानना है कि मंडी प्रशासन जब भी कोई इस प्रकार के निर्णय लेता है उस समय व्यापारी प्रशासन एवं किसान संगठनों के प्रतिनिधि मंडल को सामूहिक रूप से बैठकर सर्वसम्मति निर्णय पारित करना चाहिए किसान प्रतिनिधियों का इस प्रकार के निर्णय में शामिल नहीं करना अपने आप में यह भी एक प्रशासन की एक तरफा नीति का उदाहरण है

अतः भारतीय किसान संघ किसान को इस प्रकार के नियमों से अनावश्यक रूप से बांधकर परेशान करने की कार्रवाई की घोर निंदा करता है और खुले तौर पर मुंग को बेचने की और उचित कीमत पर मूंग को खरीदने की मांग करता है क्योंकि शासकीय समर्थन मूल्य ₹7000 है जबकि 55 सौ से 65 सौ के बीच में मूंग को लिया जा रहा है1500 15 सो रुपए का अंतर किसान के लिए बहुत बड़े घाटे में ले जाएगा जबकि सरकार है केवल ₹800 भावांतर देने का वादा करती है वह भी बिना पंजीयन कराए मिलेगा कि नहीं यह भी निश्चित नहीं है ऐसे में व्यापारी के हाथों औने पौने दाम में मूंग बेचने मजबूर है किसान सरकार उक्त समस्या पर दे तुरंत ध्यान जिला प्रशासन से हस्तक्षेप करने की अपील ।।गाडरवारा कृषि उपज मंडी पर तत्काल दिया जाए ध्यान।।

2500 का घाटा अधिकतर किसानों को लगता है क्योंकि 7000 की रेट पर एक आध कोई ढेर खरीदा जाता है यदि मंडी से उच्चतम रेट के कितने ढेर खरीदे गए इस बात का पता लगाया जाए तो इस बात की सत्यता ज्ञापित होगी इसलिए यह एक मोनोपोली के तहत किसान को घाटा देने का षड्यंत्र इस वायदा बाजार में होता है इसलिए सरकार को समर्थन मूल्य पर ही खरीदी कराना सुनिश्चित कराना चाहिए यह मांग काफी लंबे समय से भारतीय किसान संघ करता आ रहा है और लगातार करता रहेगा क्योंकि लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य जब तक किसान को नहीं मिलेगा तब तक किसान केवल और केवल मेहनत ही करता रहेगा फायदा लेबर और व्यापारियों को ही होगा क्योंकि जब हम लागत और मूल्य के बीच का खर्च निकालते हैं तो ध्यान में आता है कि किसानी घाटे का सौदा सिद्ध होती है इसलिए सरकारों को शीघ्र अति शीघ्र कोई ठोस नीति बनाना चाहिए देश के हम भंडार भरेंगे लेकिन कीमत पूरी लेंगे यह वाक्य के साथ भारतीय किसान संघ हमेशा किसानों की लड़ाई लड़ता रहेगा.