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शराब दुकान में एमआरपी से अधिक मूल्य पर बेची जा रही शराब, आबकारी और ठेकेदारों के बीच नूरा कुश्ती में पिसा रहे सुराप्रेमी
June 13, 2020 • TIMES OF CRIME , Editor : VINAY G. DAVID • मध्य प्रदेश / छत्तीसगढ़
शराब दुकान में एमआरपी से अधिक मूल्य पर बेची जा रही शराब, आबकारी और ठेकेदारों के बीच नूरा कुश्ती में पिसा रहे सुराप्रेमी

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ब्यूरो चीफ मुलताई, जिला बैतूल // राकेश अग्रवाल 7509020406 

मुलताई। शासकीय मदिरा दुकानों में इन दिनों जमकर मनमानी चल रही है, जिससे सुराप्रेमियों से शराब के एवज में मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। नगर में बैतूल मार्ग पर स्थित शराब दुकान में खुलेआम एमआरपी मूल्य से अधिक मूल्य पर शराब बेची जा रही है, जिससे सुराप्रेमियों में रोष बना हुआ है।

बताया जा रहा है कि जहां पहले ठेकेदार ने जमकर 10 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत एमआरपी से ज्यादा मूल्य की वसूली की वहीं अब आबकारी विभाग भी एमआरपी मूल्य से अधिक मूल्य पर शराब की बिक्री कर रहा है। ठेकेदारी खत्म होने के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि अब सुराप्रेमियों को निर्धारित मूल्य पर शराब उपलब्ध होगी, लेकिन आबकारी विभाग के कर्मचारियों द्वारा भी दुकान में एमएसपी मूल्य तो छोडि़ए एमआरपी मूल्य से अधिक मूल्य पर शराब की बिक्री की जा रही है।

अधिक मूल्य दे चुके उपभोक्ताओं ने बताया कि अंग्रेजी शराब ब्लेंडर प्राईड पर एमएसपी मूल्य 1130 रूपए अंकित है, वहीं एमआरपी 1355 रूपए है जिसके बीच की राशि आबकारी विभाग द्वारा नियमानुसार ली जाना चाहिए, लेकिन शासकीय दुकान से खुलेआम 1400 से 1500 रूपए वसूले जा रहे हैं तथा और कोई विकल्प नही होने से सुराप्रेमी बढ़े हुए मूल्य पर ही शराब खरीदने पर मजबूर हैं। इसके अलावा अन्य ब्रांड की शराब के भी वहीं हाल है जिसमें मूल्य बढ़ाकर लिए जा रहे हैं। सुराप्रेमियों ने बताया कि इस वर्ष जब से ठेके हुए हैं तब से यह मनमानी जारी है।

ठेकेदारों के बाद आबकारी विभाग भी उसी ढर्रे पर चलते हुए बढ़े हुए मूल्य पर शराब बेच रहा है एैसी स्थिति में जहां सुराप्रेमियों को अतिरिक्त राशि चुकाना पड़ रहा है वहीं इसकी शिकायत अब कहां करें इसे लेकर भी संशय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि रविवार से आबकारी विभाग द्वारा पुन: वैकल्पिक तौर पर एक सप्ताह के लिए दुकान ठेके पर दी जा रही है जिससे फिर सुराप्रेमियों की जेब हल्की होगी।

सुराप्रेमियों के अनुसार आबकारी विभाग तथा ठेकेदारों की नूरा कुश्ती से लगातार मनमानी जारी है जिसका खामियाजा सुराप्रेमियों को अधिक दाम देकर भोगना पड़ रहा है।