ALL राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मध्य प्रदेश / छत्तीसगढ़ क्राइम / अपराध राजनीति मनोरंजन / सिनेमा खेल खिलाड़ी स्वास्थ्य जगत शिक्षा / कैरियर बिजनेस / तकनीकी
वीडियो ख़बर आटा घोटाला : कोरोना त्रासदी लॉकडाउन में गरीबों का राशन में भी घोटाला, 10 kg के कट्टे में 7 kg आटा
April 18, 2020 • TIMES OF CRIME , Editor : VINAY G. DAVID • मध्य प्रदेश / छत्तीसगढ़
वीडियो ख़बर आटा घोटाला : कोरोना त्रासदी लॉकडाउन में गरीबों का राशन में भी घोटाला, 10 kg के कट्टे में 7 kg आटा

TOC NEWS @ www.tocnews.org

खबरों और जिले, तहसील की एजेंसी के लिये सम्पर्क करें : 98932 21036

कोरोना वायरस संकट में मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार गरीबों का राशन तक गटक जा रही है। एमपी सरकार द्वारा चलाए जा रहे 10 किलो आटा देने की योजना के लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के 10 किलो कट्टे में 3 किलो कम आटा निकल रहा है।

भोपाल,   मध्यप्रदेश कांग्रेस ने ग्वालियर में शासकीय राशन दुकानों द्वारा बांटे जा रहे दस किलो आटे के पैकेट में करोड़ों के घोटाले का भांडाफोड़ किया है। कांग्रेस विधायक  प्रवीण पाठक ने शासकीय राशन दुकानों द्वारा बांटे गये आटा पैकेट का जब बजन करवाया तो हर पैकेट में डेढ़ से चार किलो आटा कम पाया गया ।

घटना का विडियो जारी करते हुए पाठक ने बताया कि लगभग 70 लाख आटा पैकेट प्रशासन द्वारा बांटे जाना है ,इस लिहाज से लगभग 18000 टन आटे की हेराफेरी से करोड़ों रुपये का घोटाला किया जा रहा है।

वीडियो ख़बर : आटा घोटाला 

गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद खाद्य विभाग के अधिकारी कट्टे में खुद 1 किलो आटा कम होने की बात स्वीकार कर रहे हैं। बता दें कि अभी हाल ही में लॉक डाउन ले दौरान कांग्रेस के 20 विधायक इधर-उधर करने के बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी है। लेकिन गरीबों की बात करने वाले सीएम शिवराज के राज में गरीबों का हक़ मारा जा रहा है।

ये मामला सबसे पहले ग्वालियर में सामने आया, जब नई सड़क पर हरि निर्मल टॉकिज के सामने एक राशन की दुकान से शिकायत मिली। यहां पर जब एक व्यक्ति ने आटे का वजन कराया तो कट्टे का वजन महज 8.85 किलो ही निकला। इसके बाद दुकान क्व बाहर खड़े अन्य लोगों ने भी अपने आटे के कट्टे का वजन कराया, सामने आया कि सभी के कट्टों में वजन कम है।

इस अमानवीय भ्रष्टाचार के सामने आने के बाद अधिकारी जांच में जुट गए हैं। लेकिन कोरोना महामारी के समय जब गरीब आदमी खाने का मोहताज हो रहा है तब सरकारी तंत्र उनके पेट से निवाला छीनना चाहता है।